ज़िन्दगी का सफ़र
इस ब्लॉग में आप ज़िन्दगी के सफर से रूबरू होंगे। आशा है आपको ये ब्लॉग पसंद आएगा।
Saturday, 5 August 2023
सावन की भीगी शाम. . . वो बातें वो नगमा तेरे नाम. . .
चिलचिलाती गर्मी से राहत देने के लिए इस बार सावन (Sawan) पूरे 2 महीने के लिए आया है. ऐसे में रिमझिम बारिश से मौसम तो सुहावना होता ही है साथ ही मौसमी फल और सब्जी का आनंद भी उठाने में बहुत मजा आता है. आज इस ज़िन्दगी के सफर में बात कर रहे हैं वो शाम की जिसका इंतजार हम सभी को होता है. ये शाम ना सिर्फ चेहरे पर मुस्कान लाती है बल्कि दिन भर की थकावट भी कम करती है. सावन (Sawan) में अगर दिन में धूप आ गई तो उमस बहुत परेशान कर देती है ऐसे में शाम के वक्त अगर बादल छा जाते हैं या बारिश हो जाती है तो वो लम्हा बेहद खास और अहम हो जाता है. इसी कड़ी में आज सावन की भीगी शाम के बारे में बात करेंगे.
धान (Paddy) की रोपाई का ये मौसम हर गाँव के लिए खास होता है. खेतों में पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है और सावन में बारिश खेतों के लिए अमृत वर्षा के समान मानी जाती है. इस बारिश से बागों में आम पक जाते हैं तो कहीं पानी की प्यास से सूख रही धरती को जल मिल जाता है. दोस्तों का ग्रुप या ऑफिस की शाम हर कोई चाय की चुस्की और गरमागरम समोसे के स्वाद का आनंद लेता है. सावन की बारिश की खुशबू कई लोगों को पसंद आती है क्योंकि उसमें मिट्टी की सुगंध आती है. पूरे भारत में और खासतौर पर यूपी (UP) में लोग इस पवित्र-पावन सावन को बेहद खास मानते है. भगवान शिव (Shiv) की आराधना कर रहे भक्त शिव भक्ति में लीन होते हैं और हर सोमवार को उपवास रखते हैं.
सावन के इस पावन महीने में चौतरफा सुगंध और हरियाली देखने को मिलती है. शाम के वक्त लोग अपने घरों से निकलकर बाहर की शुद्ध हवा का आनंद लेते हैं. इस सीजन में अमरुद, आम, जामुन और तमाम रसीले फल खाने को मिलते हैं. बॉलीवुड में सावन पर तमाम गाने बने हैं और बारिश को लेकर गानों की बौछार सी आ गई है. कमेंट बॉक्स में बताएं सावन और बारिश के मौसम कौन सा गाना आपका सबसे फेवरिट है.
- अर्पित ओमर
(Arpit Omer)
Sunday, 27 June 2021
ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से हो रहा 'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम'!
टेक्नोलॉजी ने लोगों के जीवन को आज काफी एडवांस बना दिया है। अब हर चीज आपके स्मार्टफोन में मौजूद है जिसे आप कहीं भी और कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मनोरंजन हो या किसी से बात करना, वीडियो देखना हो या गाने सुनना, गेम से लेकर बैंकिंग तक की सुविधा अब स्मार्टफोन के एक टच में मौजूद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर वक्त स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से आपके शरीर पर इसका कितना गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
स्मार्टफोन इस्तेमाल करते वक़्त सबसे ज्यादा असर गर्दन में पड़ता है। गर्दन में इस दर्द को 'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम' कहते हैं। टेक्स्ट नेक बार-बार गर्दन में लगने वाली चोट होती है जो लम्बे समय तक सिर को आगे-पीछे की ओर झुकाकर रखे रहने पर होता है। लगातार कई घंटों तक गर्दन को झुकाए रखने से रीढ़ की हड्डी में काफी प्रभाव पड़ता है। हम अपने सिर को जितना झुकाते हैं हमारी गर्दन पर उतना अधिक बल पड़ता है। जिससे गर्दन पर दर्द पैदा होता है और वो सीधा रीढ़ की हड्डी पर प्रभाव छोड़ता है।
टेक्स नेक के प्रभाव
स्मार्टफोन पर काफी देर तक सिर झुकाए रखने से सबसे पहले सिर दर्द होना शुरू होता है। इसके बाद गर्दन, कन्धों और पीठ की मांसपेशियों को कमजोर करना शुरू करता है। कभी - कभी पीठ के ऊपरी भाग में दर्द और कठोरता महसूस होती है। साथ ही नसों में सूजन की भी शिकायत होती है। जब गर्दन को 60 डिग्री तक झुकाया जाता है तो कशेरुक स्तंभ को बहुत अधिक भार सहना पड़ता है जो कि लगभग 27 किलोग्राम के भार के समान हो सकता है जिसका अर्थ है कि लगभग 7 या 8 साल के बच्चे का वजन।
आज के समय में हर किसी के पास स्मार्टफोन है क्योंकि स्मार्टफोन अब हर किसी की जरूरतों में ये प्राथमिक बन गया है। बिना फोन के लोग खुद को काफी बोर और अकेला समझते हैं। घर से बाहर जाना हो या घर में समय बिताना हो तो फोन हाथ में होना जरुरी हो गया है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक अब फोन एक जीवनसाथी जैसा हो गया है। लोगों को अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाने की जरुरत है और इस तरह की दिक्कतों को योगा और व्यायाम से ठीक किया जा सकता है।
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम से बचने के टिप्स
स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय अपनी पीठ को सीधा रखते हुए फोन को अपने चेहरे के सामने पकड़ें। अगर आपको अपना फोन देखने के लिए नीचे देखना है तो सिर्फ आँखें झुकाएं। हर दिन फोन पर घंटों समय बिताना कम करें, जितनी जरुरत हो सिर्फ उतना ही समय दें, अनावश्यक समय देने से समय और शरीर दोनों को नुकसान होगा। थोड़ी शारीरिक मेहनत करें जिससे आपके कान आपके कंधों के साथ ठीक बने रहें।
इसके साथ ही थोड़ी कसरत करना भी बेहद जरुरी है। अपने सिर को बाएं से दाएं कई बार ले जाएं। सिर को धीरे से दाहिनी ओर तिरछा घुमाएं। हर दिशा में 5 बार घुमाएं और दोहराएं। सिर के पीछे हाथों को रखें और धीरे - धीरे सिर को नीचे की ओर झुकाएं। गर्दन के पीछे खिचांव महसूस होने पर रोकें। करीब 5 बार दोहराएं। धीरे-धीरे सिर को ऊपर और पीछे करें जहां तक आराम से ले जा सकते हैं। करीब 10 बार दोहराएं।
Sunday, 25 April 2021
होम आइसोलेशन में ये चीजें अपने पास जरूर रखें
भारत में कोरोना काफी तेजी से फैल रहा है ऐसे में कुछ मरीज होम आइसोलेशन में भी हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में लाखों भारतीय होम क्वांरीटन हैं। क्वारंटीन में रहते हुए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरुरी है।
भारत में होम क्वारंटीन और आइसोलेशन एक - दूसरे के साथ इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उनके बीच महत्वपूर्ण अंतर है। सीडीसी के मुताबिक, आइसोलेशन दूसरों से उन लोगों को दूर रखता है जो एसिम्पटोमैटिक मामले समेत कोरोना की जांच में पॉजिटिव पाए गए हैं। ये अस्पताल या घर पर हो सकता है। क्वारंटीन दूसरों से अलग करती है उन लोगों को जो संक्रमित शख्स के संपर्क में थे।आइये जानते हैं ऐसी क्या चीजें हैं जो होम आइसोलेशन में काम आती हैं।
होम आइसोलेशन में हैंड सैनेटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मोमीटर, 14 दिन की खाद्य सामग्री और साफ-सफाई के सामान, दवा, इम्यूनिटी बढ़ाने वाले सप्लीमेंट्स जैसे- विटामिन सी, डी और जिंक, डिस्पोजेबल प्लेट, प्याला, क्वांरीटन रूम में फर्श की सफाई के लिए डिसइंफेक्टेंट स्प्रे या वाइप्स जरूरी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, होम आइसोलेशन के तहत मरीजों को लक्षण शुरू होने के 10 दिन या तीन दिन तक बुखार नहीं होने के बाद छुट्टी दे दी जाएगी. उसके बाद मरीज को घर पर आइसोलेट करने की सलाह दी जाएगी और अगले 7 दिनों तक अपने स्वास्थ्य की खुद से मॉनिटरिंग करनी होगी।
- अर्पित ओमर (सीनियर कंटेंट राइटर)
arpit.itees@gmail.com
Saturday, 24 April 2021
एक्सरसाइज करेंगे तो नहीं होगा आपको कोरोना!
कोरोना से बचने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बेहद जरुरी है। एक रिसर्च के अनुसार, जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते, उनमें कोरोना से मरने का खतरा ज्यादा है। दिन भर एक ही जगह पर बैठे रहना और शरीर में आलस पैदा होना एक बड़ी वजह है। फिजिकल एक्टिव न रहने वालों को कोरोना से मौत का खतरा काफी ज्यादा होता है।
कोरोना से बचने के लिए आज से एक्सरसाइज शुरू करें। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में नई रिसर्च से पता चला है जिसमें कोरोना से संक्रमित 50 हजार से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था। रिसर्च के मुताबिक ऐसे लोग जो पिछले 2 साल से फिजिकली एक्टिव नहीं हैं, उन्हें अगर कोरोना हो जाता है तो उनकी जान का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। स्टडी के अनुसार, जो लोग एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाते हैं, उन्हें कोरोना का खतरा बहुत कम है। उनकी तुलना में आलसी लोग जल्दी संक्रमित हो रहे हैं।
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
कोरोना से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। दिन में 10 मिनट मेडिटेशन करने से तनाव कम होता है और दिमाग शांत होता है। मोबाइल पर ज्यादा वक्त न बिताएं, पर्याप्त नींद जरूर लें। अपने डाइट में एंटीऑक्सीडेंट जरूर लें। फिजिकल एक्टिविटी फेफड़ों और एयरवेज से बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद कर सकता है। डाइट में भरपूर फाइबर जरूर लें। जब शरीर में फाइबर नहीं पहुंचता तो रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए फाइबर जिसमे भरपूर हो वो चीजें जरूर खाएं। मास्क जरूर पहनें और घर पर रहें, सुरक्षित रहें।
- अर्पित ओमर (सीनियर कंटेंट राइटर)
arpit.itees@gmail.com
Sunday, 17 May 2020
लॉकडाउन में घर बैठे टेंशन को कैसे दूर करें?
एक तरफ समस्या तो दूसरी तरफ तनाव, ये दोनों ही सेहत के लिए काफी हानिकारक है। जरुरत से ज्यादा सोचने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और साथ ही तमाम परेशानियां भी होने होती हैं। सही समय अगर इसका उपचार या समाधान मिल जाए तो ये खतरा टल सकता है। परामर्श मनोवैज्ञानिक शाहीन शमीम से जानते हैं कि लॉकडाउन में घर बैठे हो रही टेंशन को कैसे दूर करें?
परामर्श मनोवैज्ञानिक शाहीन शमीम ने बताया कि लॉकडाउन के समय अपने मानसिक तनाव को सही रखना बेहद जरुरी है। घर में लगातार कई दिनों तक बैठने से तनाव पैदा हो जाता है। ऐसे में अपने परिवार के साथ एक क्वालिटी समय बिताएं और साथ ही म्यूजिक सुनें, इससे मानसिक संतुलन अच्छा बना रहेगा। उन्होंने बताया कि जो चीज आपको सबसे ज्यादा पसंद हो या जो आपकी हॉबी हो जैसे कुकिंग या डांसिंग, इसे करना शुरू करें। इससे आपका मन खुशनुमा बना रहेगा। इस समय ऑनलाइन कोर्स भी चल रहे हैं जिसकी मदद से आप घर पर रहकर तमाम चीजें सीख सकते हैं।
शाहीन ने बताया कि रोजाना डायरी लिखना बहुत जरुरी है। दिमाग में चल रही तमाम बातों को डायरी में लिखने से तनाव कम होता है और चीजें साफतौर पर दिखाई देने लगती है। किसी भी चीज की अति मत करें, हर चीज एक लिमिट में ही करें। फोन भी अगर आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो वो भी थोड़ी देर ही चलाएं। इससे सिर दर्द और चिड़े-चिड़ेपन की शिकायत नहीं आएगी।
शाहीन ने ओवरथिंकिंग पर अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में अपने समय का सदुपयोग करना बेहद जरुरी है। देर रात तक फोन का इस्तेमाल बिल्कुल मत करें। सुबह समय से उठें और एक्सरसाइज जरुर करें। खाना खाते समय फोन का इस्तेमाल मत करें। एक समय में सिर्फ एक ही काम करें। आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलने की बहुत जरुरत है।
- अर्पित ओमर
arpit.itees@gmail.com













