दुनिया जैसे-जैसे डिज़िटल हो रही है वैसे-वैसे हमारा जीवन और भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस भागती दौड़ती ज़िन्दगी में कहीं आप कुछ छोड़ तो नहीं रहे हैं? एक बार रुकिए और सोचिये कि जिस रफ़्तार से हम सभी भाग रहे हैं और अपने समय को बचा रहे हैं। कहीं ये तनाव पैदा तो नहीं कर रहा है? जितना पहले आप तनावमुक्त रहते थे। क्या अभी भी उतना तनावमुक्त हैं? जवाब में शायद ना ही आएगा क्योंकि इसका सीधा सम्बन्ध हमारे वर्क प्रेशर और हमेशा चिंता से जुड़ा है। हमारी ज़िन्दगी भी एक डिज़िटल रूप में परिवर्तित हो रही है। जैसे फोन की बैट्री होती है वैसे ही हमारा मूड भी होने लगा है।
हम हमेशा अपने फोन की बैट्री की तरह ही रिएक्ट करते हैं। तकनीक ने जिंदगी को कंट्रोल किया है और फोन की बैट्री ने इंसान के मूड को। लोगों का दिमाग फोन की बैट्री के मुताबिक ही काम करता है। लंदन यूनिवर्सिटी के मार्केटिंग रिसर्चर थॉमस रॉबिन्सन और फिनलैंड की अल्टो यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, जिन लोगों की फोन की बैटरी हमेशा चार्ज रहती है वो अपनी ऊर्जा का उपयोग लंबे वक्त तक करते हैं। वहीं, जो लोग अपने फोन की बैट्री पर ध्यान नहीं देते या अक्सर उनके फोन की बैटरी कम रहती है, वे जीवन में उलझे रहते हैं। रिसर्चर्स ने लंदन के 23-57 साल के 22 ऐसे लोगों पर शोध किया जो रोजाना कहीं जाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लेते हैं। अगर ये अपनी मंजिल से 10 किलोमीटर दूर हैं या रास्ते में 10 स्टॉपेज हैं, तो ये उसकी तुलना बैट्री से करते हैं। जैसे फोन में बैट्री 50% है तो कितना समय में गंतव्य पहुंचने और बैट्री को फुल करने में कितना समय लगेगा। बैटरी का घटता पावर उन्हें समय से फोन चार्ज के लिए प्रेरित करती है। मसलन कम होती फोन की बैटरी को चार्ज करने के लिए लोग जल्द से जल्द ऐसी जगह पर पहुंचना पसंद करते हैं जहां वो अपना फोन चार्ज कर सकें।
रिसर्च में सामने आया कि जिनका फोन फुल चार्ज होता है वे पॉजिटिव महसूस करते हैं और ये सोचते हैं कि फुल बैट्री के साथ कहीं भी जा सकते हैं। वहीं आधी और इससे कम बैटरी वालों में निगेटिवटी बढ़ाती है। जिससे तनाव होने लगता है और हम अपने स्वास्थ्य के प्रति भी असंवेदनशील हो जाते हैं। रिसर्चर्स का तर्क है कि यह नई चीजों पर बढ़ती हमारी निर्भरता का परिणाम है। जब तक हम इन नई चीजों से अपनी निर्भरता ख़त्म नहीं करेंगे। ये तनाव बना ही रहेगा जिससे आगे बढ़कर तरह-तरह की बीमारी की वजह बनेगा।
- अर्पित ओमर
arpit.itees@gmail.com



Ya.. it's true
ReplyDeletenice one
ReplyDeleteVery nice
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