Saturday, 5 December 2015

बच्चे की अक्लमंदी बनी सीख

सीट पर कब्ज़ा करना बचपन से ही बच्चे सीख लेते हैं। किससे कैसे सीट हड़पनी है अच्छे से सीखते हैं जो आगे बड़े होकर ट्रेन और बस में काम आता है।

कल मैं कानपुर से लखनऊ जा रहा था तभी जनरल कोच में एक बच्चे के पिता ने खिड़की से रुमाल फेक दी और भीड़ के साथ जब वह व्यक्ति कोच में आया तो देखा कोई और बैठा हुआ है। वह दूसरे व्यक्ति से झगड़ने लगा कि मेरी रुमाल यहां रखी थी फिर भी तुम बैठ गए। ये झगड़ा बच्चा देखता रहा और किसी तरह सीट पा ली।
थोड़ी देर बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति कोच में आया। काफी देर बुजुर्ग ने आस पास देखा सीट के लिए लेकिन वहां सब सीट पर पहले से ही कब्ज़ा किये बैठे थे। यत्रियों से खचाखच भरे कोच में खड़े रहने की जगह मिल जाए वही काफी है।

अचानक बच्चे ने खड़े होकर अपनी सीट बुजुर्ग को दे दी। यह देख उसके पिता गुस्सा हो गए और सभी के सामने उसको डांटने लगे "क्यों तुम उठे अपनी सीट से?
अब तुम खड़े होकर जाना घर और समझाने लगे कि कभी अपनी सीट किसी को मत दिया करो अभी नही सीखोगे तो कब सीखोगे।"आँखों में आंसू लिए बच्चे ने कहा, "पापा स्कूल में मैम ने सिखाया था कि सफर में अगर कोई बुजुर्ग खड़े हुए यात्रा करते दिखे तो उनकी मदद करते हुए अपनी सीट देना चाहिए।" पिता की आँखों में शर्मिंदगी दिखी कि मानवता तो कही गुम सी हो गई थी मुझमे। कोच में बैठे सभी यात्री एक सुर में बोले सही बात बोली आपके बच्चे ने। बच्चे के पिता बोले, "आज मुझे यकीन हो गया कि तू आगे चलकर मेरी लाठी जरूर बनेगा,मुझे गर्व है तुमपे।

- अर्पित ओमर

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