Sunday, 17 May 2020

लॉकडाउन में घर बैठे टेंशन को कैसे दूर करें?

दुनिया में कोरोना वायरस के कहर की वजह से हर तरफ लॉकडाउन है। भारत में भी लॉकडाउन का अब चौथा चरण शुरू होने वाला है। ऐसे में लोग संक्रमण से बचने के लिए अपने घरों में कैद हैं। केंद्र और राज्य सरकार इस महामारी से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। लॉकडाउन के चलते लोग अपने कामकाज को लेकर काफी तनाव में हैं। सभी के मन में कोरोना को लेकर एक डर बना हुआ है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और आउटडोर गेम से भी दूर हैं। ऐसे में आमतौर पर मानसिक तनाव होने लगता है या फिर यूं कहें कि एक अजीब-सी टेंशन बनी रहती है कि आगे कैसे सब चलेगा और कैसे कब सही होगा। घर में रहने के दौरान कई बार परिवार में विवाद हो जाता है ऐसे में धैर्य से काम लें।
एक तरफ समस्या तो दूसरी तरफ तनाव, ये दोनों ही सेहत के लिए काफी हानिकारक है। जरुरत से ज्यादा सोचने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और साथ ही तमाम परेशानियां भी होने होती हैं। सही समय अगर इसका उपचार या समाधान मिल जाए तो ये खतरा टल सकता है। परामर्श मनोवैज्ञानिक शाहीन शमीम से जानते हैं कि लॉकडाउन में घर बैठे हो रही टेंशन को कैसे दूर करें?

परामर्श मनोवैज्ञानिक शाहीन शमीम ने बताया कि लॉकडाउन के समय अपने मानसिक तनाव को सही रखना बेहद जरुरी है। घर में लगातार कई दिनों तक बैठने से तनाव पैदा हो जाता है। ऐसे में अपने परिवार के साथ एक क्वालिटी समय बिताएं और साथ ही म्यूजिक सुनें, इससे मानसिक संतुलन अच्छा बना रहेगा। उन्होंने बताया कि जो चीज आपको सबसे ज्यादा पसंद हो या जो आपकी हॉबी हो जैसे कुकिंग या डांसिंग, इसे करना शुरू करें। इससे आपका मन खुशनुमा बना रहेगा। इस समय ऑनलाइन कोर्स भी चल रहे हैं जिसकी मदद से आप घर पर रहकर तमाम चीजें सीख सकते हैं।
शाहीन ने बताया कि रोजाना डायरी लिखना बहुत जरुरी है। दिमाग में चल रही तमाम बातों को डायरी में लिखने से तनाव कम होता है और चीजें साफतौर पर दिखाई देने लगती है। किसी भी चीज की अति मत करें, हर चीज एक लिमिट में ही करें। फोन भी अगर आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो वो भी थोड़ी देर ही चलाएं। इससे सिर दर्द और चिड़े-चिड़ेपन की शिकायत नहीं आएगी।
शाहीन ने ओवरथिंकिंग पर अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में अपने समय का सदुपयोग करना बेहद जरुरी है। देर रात तक फोन का इस्तेमाल बिल्कुल मत करें। सुबह समय से उठें और एक्सरसाइज जरुर करें। खाना खाते समय फोन का इस्तेमाल मत करें। एक समय में सिर्फ एक ही काम करें। आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलने की बहुत जरुरत है।
- अर्पित ओमर
arpit.itees@gmail.com

Thursday, 7 May 2020

कोरोना वायरस से बचने का क्या है ब्रह्मास्त्र?


ये ऐसा वक़्त है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। होली बीतने के बाद मानो समय ने ऐसे करवट ली जैसे समय ने हमें बांध दिया हो। एक ऐसा शब्द जिसका किसी ने नाम नहीं सुना था जिसका जिक्र कभी नहीं हुआ था। आज हर किसी की जुबां पर उसका नाम है। जान तो आप भी गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं। सही सोचा आपने (कोरोना वायरस)।


देश और दुनिया में कोरोना वायरस ने अपना जाल पूरी तरह से बिछा दिया है. हर तरफ चीख-पुकार की ख़बरें आ रही हैं. मौतों का आंकड़ा ढाई लाख से ज्यादा हो चुका है वहीँ संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 38 लाख पार कर चुका है. सिर्फ अमेरिका में 75 हजार से ज्यादा मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस के खौफ से पूरी दुनिया सहम गई है. लोगों ने कभी लॉकडाउन नाम का शब्द नहीं सुना था. सिर्फ अभी तक डाउनलोड सुना था. लेकिन इस महामारी ने लॉकडाउन शब्द का अर्थ और इसका महत्व भी समझा दिया. समाज से जुड़ने वाले लोग अब समाज से दूरी बना रहे हैं। हर वक्त घर के बाहर घूमने वाले लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। कोरोना वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो न सिर्फ व्यक्ति को बीमार करता है बल्कि उसकी जान तक ले लेता है। देश-विदेश के वैज्ञानिक और डॉक्टर्स इस संक्रमण से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं वहीँ दूसरी ओर पैरा मेडिकल स्टाफ मरीजों को किसी तरह ठीक करने में जुटा है।
समय ने ऐसी करवट ली है कि लोग अपने घर जाने के लिए तरस रहे हैं। दो वक़्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से न किसी की आमदनी हो रही है और न ही किसी को रोजमर्रा का जरुरत का सामान मिल रहा है। लॉकडाउन तोड़ने पर पुलिस की लाठी और जख्म पैदा कर रही है। साल 2020 कोरोना वायरस की वजह से काला समय बन रहा है। सरकार इस महामारी से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार ने आरोग्य सेतु एप के माध्यम से 135 करोड़ की जनता को जोड़ने का प्रयास किया है जिससे हर व्यक्ति को पता हो की उसके आस-पास कोई कोविड-19 का संक्रमित व्यक्ति तो नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से ही लोगों को कोरोना वायरस से बचाया जा सकता है। आपने वो कहावत तो सुनी होगी ‘अपनी सुरक्षा अपने हाथों’। इसी के मद्देनज़र अपने हाथों को बार-बार सही से धोना भी बचाव का एक मूलमंत्र है।
ज़िन्दगी के सफ़र में इस महामारी से लड़ने के लिए सावधानी के ब्रह्मास्त्र का प्रयोग ही कारगर है। दूसरे राज्यों और विदेशों में फंसे भारतीयों को भी सरकार किसी तरह घर भेज रही है। आने वाले समय में लोगों की लाइफस्टाइल में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा। हैंडशेक से लेकर नमस्ते तक और मेकप से लेकर मास्क तक नए बदलाव के रूप में दिखाई देंगे। प्रकृति अपने नियम खुद बनाती है और उसके हिसाब से ही दुनिया को चलना पड़ता है। अपने जीवन में आए बदलाव को स्वीकार करिए और समय के साथ खुद को बदलने का प्रयास करिए। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करिए और मास्क को अपने जीवन का हिस्सा मान लीजिये। जान है तो जहान है।
अर्पित ओमर
arpit.itees@gmail.com