Friday, 12 January 2018

अगले जनम मोहे पनीर ही कीजो

बात जब पनीर की हो और मुह में पानी ना आए ऐसा तो हो नहीं सकता. भई हम सबको पनीर और पनीर से बनीं सब्जियों से लेकर पनीर टिक्का तक खूब पसंद है लेकिन कभी हम लोगों ने सोचा है कि पनीर को हम जितना प्यार करते हैं. जितना आदर सम्मान देते हैं. क्या पनीर भी हम सबको उतना प्यार करती है ? क्या पनीर कभी इंतज़ार करती है कि कोई प्रेमी आए और मुझे ले जाए ? तो आइये आपको बताते हैं कि पनीर हम सभी को कितना प्यार करती है और क्या-क्या सोचती है ?


पनीर जो देखने में गोरी और भाव खाने वाली, तेवर दिखाने वाली दुनिया में सबकी फेवरिट है. पनीर कभी ना रुलाती है और ना कभी उफ्फ करती है. लेकिन पनीर से एक शादी में प्लेट ने पूछा कि माई डिअर पनीर, तुम्हे तो हर कोई मुझपर रखता है और बेहद ही प्रेम और सद्भाव से खाता है फिर भी तुम किस्मत को हमेशा क्यों दोष देती हो ? पनीर हमेशा से शांत स्वभाव की थी. प्लेट के सवाल पर पनीर ने कहा कि इस दुनिया में मैं हर रूप में हर रंग में हर रेस्तरां में और यही नहीं.... दुनिया के सभी मशहूर होटल में मैं पाई जाती हूँ. लेकिन जब मैं उन बड़े रिहायशी होटल जाती हूँ तब रास्ते में मैं बहुत से मासूम बच्चों को देखती हूँ जो बिस्किट और दाल चावल से अपनी ज़िन्दगी का गुज़ारा करते हैं. साथ ही कूड़े के ढेर में भी खुद को देखती हूँ जो मुझे महसूस कराता है कि मेरी किस्मत ऐसे प्रेमियों से जुड़ी है जो मुझे छोड़ देते हैं. अगर मुझसे प्रेम ही नहीं था तो फिर मुझे लिया क्यों ? बीच रास्ते में खुद को जब पाती हूँ तो लगता है मेरा कोई वाजूद ही नहीं है और मैं निराश हो जाती हूँ.


पनीर अपनी नम आँखों से बोली, मेरी इच्छा है कि मैं उनके पेट में जाऊं जिन्होंने कभी मेरा स्वाद नहीं लिया. इन रिहायशी होटल में मुझे बनावटी प्यार दिखाकर मुझे प्लेट में आधा बचाकर छोड़ देते हैं जिससे मेरा अपमान होता है और मैं किसी कूड़े के ढेर में पड़ी रहती हूँ.

प्लेट की आँखों से आंसू गिरने लगे और बोला कि बात तो तुम सही कह रही हो. जब तुमको चाहने वाले तुमको आधा छोड़ देते हैं तो वो सच्चे प्रेमी नहीं हो सकते हैं. सच्चे प्रेमी तो वो गरीब बच्चे हैं
जो तुम्हारा नाम सुनते ही ख़ुशी से झूम उठते हैं और उनकी आँखों में तुम्हारे लिए जो प्यार झलकता है वो ही सच्चा प्यार होता है. पनीर ने प्लेट के जरिये अपने सभी प्रेमियों से अपील की कि अगर आप मुझे सच्चा प्यार करते हैं तो प्लीज़ मुझे पूरा खाना, कभी आधा मत छोड़ना और कभी मौका मिले तो मुझे उन गरीब बच्चों के पेट में भी जाने देना .... क्योंकि मैं अपने सच्चे प्रेमियों तक पहुंचना चाहती हूँ जो मुझे सच्चे दिल से स्वीकार करें और मुझे ढेर सारा प्यार दें. प्लेट ने पनीर की ओर देखते हुए कहा कि अगले जनम मोहे पनीर ही कीजो.


-    अर्पित ओमर 
arpit.itees@gmail.com

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