Sunday, 8 February 2015

बुजुर्ग महिला का हौसला

रोजाना लखनऊ से कानपुर की रेलयात्रा तो होती रहती है लेकिन कभी कभी यात्रा के दौरान कुछ ऐसे यात्रियों से मुलाकात होती हैं जिनसे मिलने के बाद आपको लगेगा कि इस दुनिया में सिर्फ हमही परेशानियों का सामना नहीं कर रहे हैं सभी के पास अपनी गंभीर समस्याएँ हैं। कोई बीमारी से पीड़ित है तो कोई आर्थिक रूप से, कोई अपने परिवार से परेशान है तो कोई खुद की गलत आदतों से पीड़ित है। इस भागती दौड़ती ज़िन्दगी में खुद के बारे में सोचने के लिए किसी के पास समय नहीं है, सभी खुद में व्यस्त हैं।

बात है उन दिनों की जब नए साल का आगाज हुआ था और लोग अपने शहर या गाँव रेल से जा रहे थे तभी जनरल डिब्बे में एक व्यक्ति अपनी सिगरेट को अँगुलियों में फंसाए हुए बोला कि "माचिस है क्या ?" डिब्बे में बैठे व खड़े सभी यात्री के चेहरे पर उसके प्रति गुस्से की भावना दिख रही थी तभी मैंने जवाब दिया कि "नहीं है लेकिन क्यों चाहिए ?" व्यक्ति बोला कि "दिखाई नहीं देता सिगरेट जलानी है।" मैंने कहा कि "तुम इस सिगरेट से खुद को क्यों बर्बाद कर रहे हो और साथ ही यहाँ बैठे अन्य यात्री भी तुम्हारे धुंए की वजह से तमाम बिमारियों का शिकार हो सकते हैं।"

तभी एक बुजुर्ग महिला छोटे से थैले में ढेर सारे अमरुद के साथ बोलते हुए निकली कि "5 के दो अमरुद, 5 के दो अमरुद।" हालाँकि उस जनरल डिब्बे में तनिक भी जगह नहीं थी कि महिला चलती गाड़ी में एक स्थान से दूसरे स्थान जा सके क्योंकि सभी जनरल डिब्बे इस कदर भरे हुए थे कि सीटों के अलावा लोग डब्बे की जमीन पर भी कुछ खड़े व बैठे हुए थे। वह व्यक्ति उस बुजुर्ग महिला से बोला कि "अमरुद बेच रही हो या बादाम, इतने महंगे" उस बुजुर्ग महिला ने जवाब दिया कि "तुम्हारी सिगरेट से तो लाख गुना अच्छा है ये अमरुद, एक सिगरेट तुम 5 रूपए में खरीदकर खुद को मौत के मुंह में धकेल रहे हो उससे अच्छा है 5 रूपए के दो अमरुद खा लो। तुम सिगरेट - शराब पीकर सारे पैसे बर्बाद करते हो, घर में अनाज का दाना तक नहीं होता लेकिन सिगरेट शराब पीने के लिए तुम लोगों के पास हमेशा पैसे रहते हैं। मै अपना पेट भरने के लिए इस उम्र में भी अमरुद बेच कर अपना घर चला रही हूँ, माना कि अमरुद महंगे बेच रही हूँ लेकिन उनसे तो लाख गुना अच्छी हूँ जिनके हाथ पैर सही सलामत होने के बावजूद सड़क और ट्रेनों में भीख मांगते हैं। मैं बूढी जरुर हो गई हूँ लेकिन जब तक मुझमे जान है तब तक मै काम करुँगी और मेहनत करके अपना पेट भरुंगी।"

व्यक्ति ने कहा कि "सिगरेट से मुझे सुकून मिलता है दुनिया के तमाम झंझटों और सिर दर्दी से राहत मिलती है। बुजुर्ग महिला बोली कि "जिसे तुम राहत का नाम दे रहे हो वो तुम्हारी मौत की आहट है, ये नशा बन चुकी है तुम्हारा। तुम्हे लगता है कि इससे तुम्हे सुकून मिलता है लेकिन असलियत में ऐसा नहीं है। तुम मेरे बेटे की उम्र के हो इसलिए तुम्हे समझा रही हूँ कि गुटखा, सिगरेट और शराब सिर्फ एक नशा है जो इंसान को खाता है।"

उस व्यक्ति ने माफ़ी मांगते हुए बुजुर्ग महिला से कहा कि "आप सही बोल रही हैं मेरे घर में हर रोज इसी को लेकर बहस होती है जिससे मेरे परिवार में अशांति बनी हुई है और आर्थिक रूप से भी मैं कमजोर रहता हूँ साथ ही किसी भी काम में अब मन भी नहीं लगता। आज से ही मैं इस सिगरेट को अपनी ज़िन्दगी से ख़त्म करता हूँ।" ऐसा बोलते हुए व्यक्ति ने अपनी सिगरेट को खिड़की से बाहर फेक दिया और बुजुर्ग महिला से अमरुद खरीदा। मेरे साथ - साथ वहां बैठे सभी यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और सभी ने बुजुर्ग महिला के हौसले और उसकी विचारों की प्रशंसा की।

- अर्पित ओमर

4 comments:

  1. लेखक अर्पित ओमर जी .... बहुत अच्छा लगा पढ़ कर .... मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं ......

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