ज़िन्दगी में कई बार
ऐसे मंज़र सामने आते हैं जब हम फैसले करने में दूसरों की सलाह लेते हैं या यूं कहें
कि खुद फैसले करने से डरते हैं। कहीं कोई भूल-चूक ना हो जाए। अक्सर जल्दबाजी में कठिन रास्ते
चुन लेते हैं, क्योंकि ऐसा लगता है कि शायद कठिन रास्ते ही समस्या का सही हल है या
हमारे जीवन को एक नई दिशा दे सकता है।
एक आम विचारधारा
“जीवन एक संघर्ष है.” – एकदम सही कहा आपने, लेकिन क्या इस संघर्ष को चुनौतीपूर्ण
बनाना ज़रूरी है? क्या इस संघर्ष को एक सरल दिशा नहीं दी जा सकती है? क्या कठिन
रास्ता ही समस्या का समाधान है? इन सभी बातों को आप गंभीरता से तो लेते हैं लेकिन
इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हम क्यों खुद को तकलीफ देते हैं और क्यों आखिर दूसरे
विकल्प पर विचार नहीं करते हैं? ज़रूरत है खुद से बात करने की। खुद से सवाल पूछने की,
खुद से रूबरु होने की। ज़िन्दगी में विकल्प हर परिस्थिति में होते है ज़रूरत है
उन्हें पहचानने की और उन्हें वास्तविक जीवन में उतारने की। कई बार चीजें सामने
होते हुए भी उन्हें नहीं देख पाते क्योंकि दो मिनट शांति से बैठकर सोचना ही नहीं
चाहते। हमेशा जल्दबाजी में हड़बड़ाहट में लोग रहते हैं और आसान काम को भी कठिन बना
लेते हैं।
ज़िन्दगी में अप एंड
डाउन कई बार आते हैं। ऐसे में ज़रूरत है शांति से सही निर्णय लेने की और एक ऐसे
नतीजे पर पहुंचने की जिसमें आपकी खुशी और संतुष्टी हो। अक्सर जल्दबाजी में किए गये
फैसले गलत हो जाते हैं। पढ़ाई की बात करें या करियर की। दोनों में ही सरल और कठिन
रास्ते होते हैं। तमाम ऊहापोह की स्थिति के बाद जब एग्जाम हो जाता है तब हम इसका
विश्लेषण करते हैं कि काश ऐसा कर लिया होता तो ऐसा हो जाता। इसलिए पहले से तैयार
रहिये। जो मेहनत आपको आखिरी वक्त करनी होती है, उससे बेहतर पहले से तैयारी करें और
सही निर्णय लें।
- अर्पित ओमर
arpit.itees@gmail.com

